अस्पताल संचालक का तीन माह बाद भी सुराग नहीं… जांच अधूरी: अमृत अस्पताल में महिला की मौत का मामला, नामजद प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद संचालक की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.
साफ है कि जब तक स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन कागजी लीपापोती छोड़कर सख्त और त्वरित कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक मासूम मरीजों की जिंदगी यूं ही झोलाछाप और लापरवाह व्यवस्था की भेंट चढ़ती रहेगी।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में स्वास्थ्य व्यवस्था लाचार: मुंडेरवा के अमृत अस्पताल में महिला की मौत के 3 महीने बाद भी मुख्य संचालक फरार, कई अन्य मामलों में भी जांच लंबित
- पंजीकरण खत्म होने के बाद भी चलता मिला था अस्पताल: अस्पताल का पंजीकरण समाप्त होने के बावजूद उसका संचालन जारी था।
- अस्पताल सील होने से नहीं मिल सके अभिलेख: अस्पताल सील होने के कारण जांच टीम को जरूरी अभिलेख और दस्तावेज नहीं मिल पाए हैं।
- कई निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट लंबित: जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों में हुई मरीजों की मौतों और गड़बड़ियों से जुड़े कई अन्य मामले भी लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
- निजी प्रैक्टिस के आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर की मांगी आख्या: सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस करने के आरोप में घिरे सर्जन (एसोसिएट प्रोफेसर) के मामले में प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य से जांच आख्या तलब की है।
बस्ती: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था और निजी अस्पतालों की मनमानी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। मुंडेरवा स्थित अमृत अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के मामले को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नामजद अस्पताल संचालक डॉ. मनीष अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस ने इस मामले में दो कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मुख्य आरोपी तक पुलिस के हाथ खाली हैं।
बिना पंजीकरण धड़ल्ले से चल रहा था अस्पताल और अटकी जांच
- अमृत अस्पताल का पंजीकरण 30 अप्रैल को ही समाप्त हो चुका था, जिसके बाद भी अवैध रूप से अस्पताल का संचालन जारी था।
- अस्पताल सील होने के कारण जांच टीम को वहां के जरूरी अभिलेख नहीं मिल सके हैं, जिससे पूरी जांच प्रक्रिया अधूरी पड़ी है।
- अस्पताल में पंजीकृत चिकित्सक का बयान भी अब तक दर्ज नहीं किया जा सका है।
- सीएमओ बस्ती डॉ. राजीव निगम का कहना है कि मुंडेरवा अमृत अस्पताल की जांच अभी चल रही है, बिना पंजीकरण अस्पताल का संचालन गलत है और जांच रिपोर्ट संबंधित डिप्टी सीएमओ को निर्देशित की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
लोहदर निवासी अनिल कुमार चौधरी की पत्नी को 14 मई को खुजली की शिकायत होने पर मुंडेरवा के अमृत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि अस्पताल में बिना उचित जांच के महिला को लगातार तीन इंजेक्शन लगा दिए गए, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद अनिल कुमार की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल संचालक डॉ. मनीष और अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। संचालक की गिरफ्तारी न होने से मामले की आगे की जांच भी प्रभावित हो रही है।
जिले के अन्य निजी अस्पतालों में भी मौतों के मामले फाइलों में कैद
बस्ती जिले में केवल अमृत अस्पताल ही नहीं, बल्कि कई अन्य निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी मरीजों की मौत के मामले ठंडे बस्ते में पड़े हैं:
- पचपेड़िया रोड स्थित निजी अस्पताल में ढाई महीने पहले उपचार के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत पर परिजनों ने हंगामा किया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
- बर्दहिया स्थित निजी अस्पताल में महिला के बच्चेदानी का ऑपरेशन करने के बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई, लेकिन ढाई महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी मामला दबा हुआ है।
- कटरा स्थित अस्पताल में दो महीने पहले बुजुर्ग की मौत के प्रकरण में भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
- स्टेशन रोड स्थित अस्पताल में जच्चा-बच्चा मौत प्रकरण में एक माह से अधिक समय बीतने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो सकी है।
- मरवटिया सीएचसी के तहत बैजनाथपुर गांव में एएनएम द्वारा घर पर प्रसव कराने के दौरान प्रसूता की तबीयत बिगड़ी और कैली अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई, लेकिन परिजनों के गंभीर आरोपों के बावजूद एएनएम पर कार्रवाई नहीं हुई है।
सरकारी कुर्सी की आड़ में निजी प्रैक्टिस का गंभीर मामला
मेडिकल कॉलेज अंबेडकरनगर में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात और बस्ती में निजी प्रैक्टिस करने के आरोपी सर्जन डॉ. नवीन कुमार चौधरी पर भी शिकंजा कसने लगा है।
- नगर थाना क्षेत्र के कट्या निवासी वीरेंद्र कुमार ने डीएम को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उनके पिता पल्टूराम का ऑपरेशन ओमवीर हॉस्पिटल (कैली रोड) पर किया गया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
- डीएम द्वारा कराई गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि सर्जरी करने वाले डॉ. नवीन कुमार चौधरी वर्तमान में एमआर मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं।
- सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस के आरोप को गंभीर मानते हुए डीएम ने जांच आख्या अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को भेज दी है और सीएमओ बस्ती से विस्तृत आख्या तलब की गई है।










